15 मई,1976 को जन्मीं डाॅ॰ भारती कश्यप, एम.बी.बी.एस. आनर्स, एम.एस. ओफ्थल्मोलाॅजी, फेलो इन काॅर्निया एल. भी. झारखण्ड में महिलाओं एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सशक्त आशा, विश्वास और सहयोग की किरण बनकर उभरी हैं।

उपलब्धियाँ

  • 8 मार्च, 2018 को भारत के राष्ट्रपति महोदय के हाथों से नारी शक्ति पुरस्कार-2017 प्राप्त.
  • इण्डियन मेडिकल एसेसिएशन द्वारा दिए गए सम्मान:-
    • महिला सशक्तिकरण सम्मान – नई दिल्ली, 2018.
    • डाॅक्टर आॅफ द ईयर – नई दिल्ली, 2017.
    • मेड एचिवर अवार्ड – नई दिल्ली, 2014.
  • माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में महिला सशक्तिकरण पर रौशनी डालने के लिए आयोजित चाय पर चर्चा कार्यक्रम हेतु देश भर से आमंत्रित 6 महिलाओं में एक.

उल्लेखनीय कार्य

नेत्र चिकित्त्सा

  • दो दशकों से झारखण्ड के डाॅक्टरों की पहुँच से दूर तथा माओवाद प्रभावित ग्रामीण इलाकों में रहनेवाले बच्चों, गरीबों और वंचितों की आँखों का सम्पूर्ण ईलाज करके उनके जीवन की दशा और दिशा बदलने में सफलता.
    • झारखण्ड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले 20 लाख बच्चों की आँखों की जाँच, माओवाद प्रभावित क्षेत्रों (सरण्डा, लातेहार, पलामू, खूँटी तथा राँची) के जरूरतमन्द बच्चों को वर्ष 2006 में शुरू किए गए कम लागत वाले मोबाईल विजन सेण्टर का उपयोग करते हुए मुफ्त चश्मा उपलब्ध कराया. उन्हें दृष्टि का अनमोल उपहार प्रदान कर फिर से पढ़ने के लायक बनाया. मोतियाबिन्द से पीड़ित सैकड़ों बच्चों का मुफ्त आॅपरेशन कर उन्हें दुबारा स्कूल जाने के लायक बनाकर उनके भविष्य को संवारने में सफलता पायी.
    • झारखण्ड- जहाँ अन्धेपन की दर राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है वहाँ डाॅ॰ भारती कश्यप ने दृष्टि सम्बन्धी समस्याओं से पीड़ित दिव्यांग, मधुमेह रोगी, वृद्धाश्रम के निवासी, रेलवे स्टेशन के कुली, ट्रक चालक, रिक्शा चालक, दिहाड़ी मजदूर, आदिवासी एवं जनजातीय समुदाय के डाॅक्टरी ईलाज से वचित लोगांे की समस्याओं का निवारण कर उल्लेखनीय कार्य किया है.
  • एन.ए.बी.एच. प्रमाणित आँखों के अस्पताल एवं आई बैंक ट्रस्ट की संस्थापिका
    • फरवरी 2009 से लगातार चार टर्म से एन.ए.बी.एच. द्वारा प्रमाणित कश्यप मेमोरियल आई अस्पताल, राँची के द्वारा झारखण्ड के जन सामान्य को सस्ती दर पर श्रेष्ठतम चिकित्त्सा सेवा उपलब्ध कराना.
  • झारखण्ड-बिहार में नेत्रदान अभियान एवं नेत्र प्रत्यारोपण की शुरुआत
    • संयुक्त बिहार-झारखण्ड में स्थानीय नेत्रदान से प्राप्त प्रथम काॅर्निया के वर्ष 1995 में सफल प्रत्यारोपण का श्रेय इन्हें प्राप्त.
  • विगत 14 वर्षांे से नेत्रदान जागरुकता के लिए ‘रन फॅर विजन’ के रूप में अंधेपन के निवरण हेतु अनूठे दौड़ कार्यक्रम का आयोजन.
  • झारखण्ड में प्रशिक्षित मानव संसाधन की टीम बनाने का अनूठा प्रयोग – उद्देश्य, झारखण्ड में विज़न 2020 के लक्ष्य की प्राप्ति एवं सर्वाइकल प्री-कैंसर का झारखण्ड से उन्मूलन.
    • विजन 2020 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जमीनी तौर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए लगातार प्रयास.
    • सरकारी स्कूल के हजारों शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को आँखों की दृष्टि मापना, विटामिन ‘ए’ की कमी, टेढ़ी एवं सुस्त आँख, मोतियाबिन्द की पहचान के लिए लगातार प्रशिक्षण देकर 20 लाख सरकारी स्कूल में पढ़नेवाले बच्चोंकी जाँच की जिसके पहले फेज के नेत्र जाँच के लिए प्रशिक्षित शिक्षक एवं शिक्षिकाओं का मानव संसाधन तैयार किया.
    • झारखण्ड में 2004 से विज़न 2020 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आॅप्टोमेट्री के डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्स की संस्थापिका.
    • झारखण्ड के दूर दराज एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कम लागतवाले मोबाइल विज़न सेण्टर के संचालन में आॅप्टोमेट्री के प्रशिक्षित मानव संसाधन का उपयोग.
    • दिल्ली और कोलकाता के प्रशिक्षित कैंसर स्त्रीरोग विशेषज्ञों के द्वारा सरकारी उपक्रमों की स्त्री रोग विशेषज्ञों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरों का पूरे झारखण्ड के सदर अस्पतालों में क्रमवार तरीके से आयोजन कर जमीनी तौर पर प्रशिक्षित स्त्रीरोग विशेषज्ञों कीे टीम तैयार करना.
  • डायबिटिज से रौशनी खो रहे मरीजों के लिए ज्योज से ज्योत जलाओ रिसर्च अभियान में झारखण्ड में झारखण्ड की सबसे बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका:-
    • आॅल इण्डिया ओफ्थल्मोलाॅजिकल सोसाईटी की एकेडमिक रिसर्च कमिटि के पैन इण्डिया ज्योत से ज्योज जलाओ अभियान के तहत झारखण्ड के पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों से 751 डायबिटिज के मरीजों के आँखों के पर्दे की फोटो एवं कम्प्लीट डाटा उपलब्ध कराया जो भारत के किसी भी राज्य से भेजे गए टाटा से बहुत अधिक था.
  • झारखण्ड के युवाओं के भविष्य का संरक्षण:
    • झारखण्ड में सर्वप्रथम फेमेटो लासिक लेजर सर्जरी का शुभारम्भ तथा चश्मा रहित दृष्टि द्वारा युवाओंके भविष्य का संरक्षण एवं झारखण्ड के युवाओं को बेहद अनुकूल दर पर सुविधा.
  • नेत्र चिकित्त्सा में झारखण्ड के अग्रणी नेत्र चिकित्त्सा क्षेत्र अण्वेषक:-
    • यूरोपियन एवं अमेरिकन वार्षिक अन्तराष्ट्रीय नेत्र-चिकित्त्सा के कांफ्रेंसों में झारखण्ड क्षेत्र से सर्वाधिक प्रस्तुतिकरण का श्रेय.

समाज पर प्रभाव:-

इन समस्त प्रयासों के सुपरिणामस्वरूप जहाँ झारखण्ड में अंधेपन की दर में तेजी से कमी आ सकी है, वहीं देश के भविष्य यानि बच्चे, दुबारा स्कूली शिक्षा प्राप्त कर जिम्मेदार नागरिक बन पा रहे हैं. साथ ही साथ इससे नेत्रदान के प्रति लोगों की धारणा में पर्याप्त परिवर्तन हुआ है. अब बड़ी संख्या में लोग नेत्रदान के लिए आगे आने लगे हैं.

महिला सशक्तिकरण

  • वीमेन डाॅक्टर्स विंग, आई.एम.ए. झारखण्ड की चेयरपर्सन के तौर पूरे झारखण्ड में सर्वाइकल प्री-कैंसर (महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु का सबसे बड़ा कारण) के उन्मूलन के लिए त्रि-आयामी अभियान:-
    • 23 सरकारी सदर अस्पतालों में से 11 सदर अस्पतलों में सफलतापूर्वक जागरुकता अभियान.
    • सर्वाइकल प्री-कैंसर की पहचान तथा उपचार संयंत्रों की झारखण्ड के 11 सदर अस्पतालों में स्थापना.
    • कैंसर रोग विशेषज्ञों के द्वारा सरकारी उपक्रमों में पदस्थापित स्त्री रोग विशेषज्ञों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविरोंका आयोजन.

समाज पर प्रभाव:-

स्त्रियों में सर्वाइकल कैंसर जैसे छिपे हुए शत्रु को परास्त करने के परिणामस्वरूप महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को एक नया आयाम मिला:-

  • गांव की वैसी महिलायें जो अपने जननांग की समस्याओं और उसकी देखभाल के प्रति सजग नहीं रहती हैं, अक्सर घरेलू उपचार और अंधविष्वास की चपेट में आकर सर्वाइकल कैंसर के प्रथम स्तर की सहजता से षिकार हो जाती हैं… इस अभियान से उनमें पर्याप्त जागरुकता आयी है और अपनी समस्याओं को लेकर वे सदर अस्पताल तथा सी. एच. सी. आदि सुलभ संस्थानों तक पहुंचने लगी हैं.
  • स्वास्थ्य संस्थानों में भी पदस्थापित कर्मियों को विषेषज्ञों से प्रषिक्षण मिलने का लाभ हुआ और वे इन समस्याओं का निदान करने में सक्षम हो सकी हैं.
  • ऐसी संस्थाओं में उपयुक्त संयंत्रों की स्थापना के कारण न सिर्फ प्री-सर्वाइकल कैंसर की पहचान करना सरल हुआ है बल्कि निकटस्थ स्वास्थ्य सेवा केन्द्र पर ही इसका निदान करना भी सम्भव हो सका है.