डॉ. बिभूति कश्यप ने AIOS की पुरे देश में चल रही डायबिटिज के मरीजों के आँखों पर प्रभाव की रिसर्च को झारखण्ड में शुरू किया

AIIMS नई दिल्ली से प्रशिक्षित विट्रियो रेटिना नेत्र सर्जन डॉ. बिभूति कश्यप ने आल इंडिया ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की पुरे देश में चल रही डायबिटिज के मरीजों के आँखों  पर प्रभाव की रिसर्च को झारखण्ड में शुरू किया

देश एवं झारखण्ड के डायबिटिज के मरीजों को होगा बड़ा फायदा, क्योंकि पुरे देश के सभी राज्यों से एक-एक हजार आ रही डायबिटिज के मरीजों की डाटा एवं परदे की फोटो के आधार पर आल इंडिया ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी एक मैनेजमेंट प्रोटोकॉल बनाएगी जो हमारे देश के मरीजों पर हुए रिसर्च पर आधारित होगा जिस से हमारे देश के डायबिटिज के मरीजों की आँख के इलाज में बहुत फायदा होगा

 डायबिटिज रेटिनोपैथी पर हो रही इस रिसर्च में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • मरीज के आँखों की रौशनी
  • तम्बाकू का सेवन
  • मरीज की उम्र कितनी है और उसे कितने वर्षो से डायबिटिज है और कितनी उम्र में डायबिटीज की पहचान हुई

आल इंडिया नेत्र सोसाइटी, झारखण्ड नेत्र सोसाइटी एवं कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वधान 30 जून को डॉ. संजय रॉय के डायबिटिज सेंटर, रांची स्थित क्लिनिक में तथा 1 जुलाई को एस. एस. हाई स्कूल, ब्लाक चौक, ओरमांझी, राँची में सुबह 8:00 बजे से शाम के 5:00 बजे तक निःशुल्क डायबिटिक रेटिनोपैथी रिसर्च प्रोजेक्ट एवं नेत्र जाँच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डायबिटिज से आँखों की रौशनी खो रहे मरीजों की आँखों के पर्दे की जांच की गयी। शिविर में जिन मरीजों को आंखों के पर्दे की लेजर की आवश्यकता पाई गयी है, उन्हें रांची स्थित कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में बुला कर मुफ्त लेज़र आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदान किया जायेगा। शिविर में आये सभी मरीजों के आँखों के रेटिना की जाँच AIIMS नई दिल्ली से प्रशिक्षित विट्रियो रेटिना नेत्र सर्जन डॉ. बिभूति कश्यप के द्वारा किया गया। शिविर में आये आँखों की अन्य बिमारियों एवं मोतियाबिंद के मरीजों की जाँच डॉ. भारती कश्यप, डॉ. निधी जी. कश्यप एवं कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल की टीम के द्वारा किया गया। शिविर में मोतियाबिंद से गर्सित सभी मरीजों का ऑपरेशन कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत निःशुल्क किया जाएगा।

 

रिसर्च की रिपोर्ट :-

ग्रामीण क्षेत्र के डायबिटीज के मरीजो में डायबिटीज के वजह से आँखों के परदे की खराबी का प्रतिशत ज्यादा पाया गया क्योकि उनका डायबिटीज नियंत्रित नहीं था|

डॉ संजय रॉय डायबिटिक क्लिनिक, राँची में कुल 202 डायबिटीज के मरीजो की जांच की गयी जिनमे से जिसमे लगभग 20% मरीजो(40 मरीज) में डायबिटीज जनित रेटिना की खराबी पाई गयी|

ओरमांझी एस.एस हाई स्कूल में आये 207 ग्रामीण मरीजो में 25%(52 मरीज) मरीजो में डायबिटीज जनित रेटिना की खराबी पाई गयी|

झारखण्ड औफथल्मोजिकल सोसाइटी की सायंटिफिक कमिटी चेयरमैन डॉ. भारती कश्यप ने बताया की आल इंडिया ओफ्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने देश के सभी राज्यों की राज्य नेत्र सोसाइटी के साथ मिलकर डायबिटीक रेटिनोपैथी पर रिसर्च की शुरुआत की है। इस पैन इंडिया रिसर्च के अंतर्गत हर राज्य को एक हज़ार डायबिटीक मरीजों के आँखों के पर्दे की पिक्चर और डाटा ऑल इंडिया औफथल्मोजिकल सोसाइटी को भेजना है,  और इस एक हज़ार मरीज में दो तिहाई  गाँव एवं पहाड़ी इलाके के, डायबिटिज के मरीज होंगे और एक तिहाई शहर के डायबिटिज के  मरीज होंगे। झारखण्ड ओफ्थाल्मोलोजिकल सोसाइटी के अंतर्गत इस की शुरुआत AIIMS नयी दिल्ली प्रशिक्षित विट्रियो रेटिना सर्जन डॉ. बिभूति कश्यप ने राँची एवं ओरमांझी से की है।

डॉ. बिभूति कश्यप ने बताया की मुझे ख़ुशी है की ऑल इंडिया औफथल्मोजिकल सोसाइटी की द्वारा चलायी जा रही डायबिटीक रेटिनोपैथी की रिसर्च को झारखण्ड औफथल्मोजिकल सोसाइटी के तत्वधान में मैंने इसे रांची और ओरमांझी से शुरू किया है| आगे चल के डायबिटीज के मरीजों पर रिसर्च पूरी होने पर डायबिटीज के मरीजों को इससे काफ़ी फ़ायदा होगा, इस पर आधारित मैनेजमेन्ट प्रोटोकॉल से हमारे देश के डायबिटीज से पीडीत लोगों को काफी  फायदा होगा क्योंकि हमारे देश के लोगों पर ही ये रिसर्च बनी है। ज्यादातर प्रोटोकॉल विदेश के लोगो के ऊपर हुई रिसर्च पर बनते है जो हमारे देश में हमारे मरीजों के इलाज के लिए अनुसरण किया जाता है।